मुझको तुम अपना कहते हो
इसीलिए अच्छे लगते हो
जिससे मैंने धोखा खाया
तुम भी बिल्कुल उन जैसे हो
कैसे मानूँ बात मैं तेरी
तुम तो दुनिया के झूठे हो
तुम तो चाहो दौलत-शोहरत
कदर वफा की कब करते हो
तुमको प्यार पे यकीं नहीं है
कल उसके थे, अब इसके हो
सच को सच कहते हो
सबको तुम कड़वे लगते हो
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