तुम इक मुद्दत....

तुम इक मुद्दत बाद मिले हो
सुनाओ हमें तुम कैसे हो

दिल में रहना छोड़ा तूने
फिर आजकल कहाँ रहते हो

आज भी हमसे रूठे हुए हो
तुम बिल्कुल भी नहीं बदले हो

कह दो जो कुछ भी है कहना
चुपचाप होकर क्यों खड़े हो

लगते हो 'राकेश' तुम भी पागल
जहाँ छोड़ा था वहीं खड़े हो

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