दूरियों का एहसास ना करा,
पास आने से डर लगता है |
मैं तुझे करीब ना पाऊं,
तो जीने से डर लगता है |
ज़िन्दगी तुम्हारे बिन कैसे कटेगी,
सोच पाने से भी डर लगता है |
ख़ुशी और सुकून का रिश्ता है तुझ से,
फिर भी दिल लगाने से डर लगता है |
आँखों से आंसू निकल जाये तो ग़म नहीं,
पर तेरे उदास होने से डर लगता है |
इस वफ़ा को कल शायद निभा पाए या नहीं,
पर तेरे टूट जाने से डर लगता है ||
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सौजन्य.......
कंचन (मेरी दोस्त)
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