माना दोस्ती का रिश्ता खून का नहीं होता
लेकिन खून के रिश्ते से कम भी नहीं होता
दोस्ती में एक बात मुझे समझ नही आती है
दोस्त में लाख बुराई हो उसमे अच्छाई ही क्यु नजर आती है
दोस्त बैठाता है आपको सर आखों पर
आपकी सारी परेशानी लेता है अपने उपर
आप की गलती सारी दुनिया से छुपाता है
खुद के अच्छे कामों का श्रेय भी आप ही को देता है
दोस्त होता है ऐसे
दीयो के लिए बाती जैसे
अंधों के लिए लाठी जैसे
प्यासे के लिए पानी जैसे
बच्चे के लिए नानी जैसे
दियों के लिए बाती जैसे
लेखक के लिए कलम जैसे
बीमार के लिए मरहम जैसे
कुम्हार के लिए माटी जैसे
किसान के लिए खेती जैसे
भक्त के लिए वरदान जैसे
मरने वाले के लिए जीवनदान जैसे
अन्त में आप से एक ही बात है कहना
दोस्त को बुरा लगे ऐसा कोई काम ना करना
खुद भी खुश रहना और दोस्तों को भी रखना
चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल हो दोस्त का साथ ना छोड़ना
जाते जाते मेरी एक विनती है आप से
अपने प्यारे दोस्त को ये कविता जरुर सुनाना
मैने तो मेरा फ़र्ज निभाया
अब आपको है अपना निभाना ||||
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सौजन्य.......
कंचन (मेरी दोस्त)
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