चाँद के साथ मेरी बात ना थी पहले से,
रात आती थी मगर रात ना थी पहले से,
हम तेरी याद से कल भी मिले थे लेकिन,
ये मुलाक़ात मुलाक़ात ना थी पहले से,
आंख क्यूँ लूट गए खौफ से शेरों के,
क्यूंकि इस बार बरसात ना थी पहले से,
अब के कुछ और तरह की थी उदासी इन में,
चाँद तरून की ये बरात ना थी पहले से,
इश्क ने पल में बदल दी मेरी सारी दुनिया,
मैंने देखा ये मेरी जात ना थी पहले से......
सौजन्य.......
कंचन (मेरी दोस्त)
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