कुछ उदास कुछ खामोश
कुछ बेबस सी लकीरें मेरे हाथ की?
ढूंढ़ता रहता हूँ अक्सर लकीरों में
एक लकीर तेरे नाम की,
कुछ मालूम भी है
कुछ दिल भी जनता है
की इन लकीरों में कोई
लकीर नहीं तेरे नाम की
फिर भी ना जाने क्यूँ ढूंढ़ता रहता हूँ मैं
अक्सर,
एक लकीर तेरे नाम की ....
एक लकीर तेरे नाम की ....
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सौजन्य.......
कंचन (मेरी दोस्त)
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