ज़िन्दगी किस तरह बिताओगे,
पास जब अपने हमें न पाओगे,
दिन में तन्हाईयाँ सताएंगी,
रात को चौंक कर उठ जाओगे,
रात भर नींद क्यों नहीं आती,
तुम ये खुद भी समझ न पाओगे,
लोग पोचेंगे इस तन्हाई का सबब,
क्या छुपाओगे क्या बताओगे,
पलकें हर बार भीग जायेंगी,
जब कभी खुल के मुस्कराओगे,
मेरी यादें बहुत सताएंगी,
जब भी बारिश में भीग जाओगे,
खुद को तनहा न पा सकोगे,
हर जगह मेरा अक्स पाओगे !!!!
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सौजन्य.......
कंचन (मेरी दोस्त)
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