क्यों नजर आता है ?....

हजारों रंगों की दुनिया,
पर हर रंग काला क्यों नजर आता है ?

हर सुन्दर चेहरे पर है मुस्कराहट,
पर हर मुस्कराहट में कमी क्यों नजर आता है ?

छोटा बहुत है ये ज़िन्दगी का सफ़र,
पर हर सफ़र लम्बा क्यों नजर आता है ?

बहुत ऊँचा है मेरे सपनों का महल,
पर दिवार टुटा हुआ क्यों नजर आता है ?

रिश्तों में खोना चाहते हैं मगर,
हर रिश्ते में धोखा क्यों नजर आता है ?

इन्सान तो हम हैं मगर,
हर खून में मिलावट क्यों नजर आता है ?????





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सौजन्य.......
कंचन (मेरी दोस्त)




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