प्रेम का धागा.....

जब एक प्रेम का धागा जुड़ता है,
दिल का कमल तब ही खिलता है !

देखता है ख़ुदा भी आसमान से जमीं पर,
जब एक दिल दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करता है !

सुलगने लगता है तब धरती का सीना भी,
जब कोई आसमान बन के बाहों में पिघलता है !

लिखी जाती है तब एक दस्तान-ए-मोहब्बत,
तब कहीं जाकर अमर-प्रेम लोंगो के दिलों में उतरता है!!

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2 comments:

ओम आर्य said...

prem ka dhaagaa bahut hi sundar hai...

Mr. Rakesh Ranjan said...

Thanks OM !

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