जब एक प्रेम का धागा जुड़ता है,
दिल का कमल तब ही खिलता है !
देखता है ख़ुदा भी आसमान से जमीं पर,
जब एक दिल दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करता है !
सुलगने लगता है तब धरती का सीना भी,
जब कोई आसमान बन के बाहों में पिघलता है !
लिखी जाती है तब एक दस्तान-ए-मोहब्बत,
तब कहीं जाकर अमर-प्रेम लोंगो के दिलों में उतरता है!!
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2 comments:
prem ka dhaagaa bahut hi sundar hai...
Thanks OM !
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