इक आरजू है....

इक आरजू है पूरी परवरदिगार करे,
मैं देर से जाऊं और वो मेरा इंतजार करे !

अपने हाथों से संवारूं जुल्फें उसकी,
वो शरमा कर मोहब्बत का इकरार करे !

लिपट जाये मुझसे आलम-ए-मदहोशी में,
और जोशों-जूनून में मोहब्बत का इज़हार करे !

जब उसे छोड़ कर जाना चाहूँ मैं,
वो रोके इक और रात का इसरार करे !

क़सम खुदा की मैं किसी और का हो नहीं सकता,
ये वादा-ए-वफ़ा वो बार बार करे !!

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