तुम्हारी नजर झुके.....

तुम्हारी नजर झुके तो शाम हो जाये
मयखाने में भीड़ जाम पे जाम हो जाये

तुम चाहो तो कुछ भी कर दो
अगर पानी छु दो तो शराब हो जाये

तुम्हारी नजर तीर तलवार से भी बढ़कर है
अगर चाहो तो शहर में कत्ले आम हो जाये

अपने चाहने वालो की दीवानगी तो देखो
उनकी हर ख़ुशी तुम्हारे नाम हो जाये

मैं दुआ करता हूँ रब से
खुदा से भी ऊपर तेरा मुकाम हो जाये

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