माना की हम भुला नहीं पाते उन्हें एक पल के लिए ,
पर यूँ रोया भी नहीं जाता एक पल के लिए !
मिली जो यूँ वो मिलकर बिछड़ गयी जिंदगी के लिए ,
उन्हें दिल से नहीं लगाया जाता दिल्लगी के लिए !
माना की ये बात हर किसी को लगती है सच्ची ,
पर हर अजनबी नहीं होते ज़माने में भुलाने के लिए !
यूँ तो खुदा से जो माँगा वो पाया दुआ में ,
पर हर दुआ कहाँ कबुल होती है हर किसी के लिए !
वो आएगी ना लौटकर फिर कभी ये जानते हैं हम ,
फिर भी दिल धड़कता है आज भी उसी अजनबी के लिए !!
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