यार जो भी मिला दिल जला कर गया ,
ख़ाक में मेरी हस्ती मिला कर गया !
प्यास जिसकी सदा मैं बुझाता रहा ,
ज़हर-ए-कातिल मुझे वो पिला कर गया !
नाज़ उसकी वफ़ा पर मुझे था मगर ,
तीर वो भी जिगर पर चला कर गया !
ढूंढता था कभी जो मुझे हर गली ,
आँख वो आज मुझसे बचा कर गया !
मांगता था सहारा जो हरदम मुझसे ,
बेसहारा मुझे वो बना कर गया !
नींद आगोश में जिसकी आने लगी ,
मौत की नींद मुझको सुला कर गया !
आरजू थी "यारो" किसी की मुझे ,
ख्वाब मेरे वही तो मिटा कर गया !!!!
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