मुद्दत हो गयी ....

मुद्दत हो गयी उन तनहाइयों को गुजरे , आज भी इन आँखों में वो खामोशियाँ क्यों है

चुन चुन कर जिसकी यादों को अपने जीवन से निकाला मैंने

मेरे दिल पर आज भी उसकी हुकूमत क्यों है

तोड़ दिया जिसने यकीं मोहब्बत से मेरा

वो शख्स आज भी मेरे प्यार के काबिल क्यों है

रास ना आये जिसको चाहत मेरी

आज भी वो मेरे दिन और रात में शामिल क्यों है

खत्म हो गया जो रिश्ता वो आज भी सांस ले रहा है

मेरे वर्तमान में जीवित वो आज भी मेरा अतीत क्यों है...............

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